हाल ही में असम के सोनितपुर जिले के विमाजुली गांव
में 63 साल की ‘ओरंग’ नाम की एक महिला पर डायन होने का आरोप लगाते हुए भीड़ ने उसका
सिर काट कर मार डाला| आरोप है कि किसी पुजारी के कहने पर करीब 200 लागों की भीड़ ने इस कृत्य को अंजाम दिया।
ठीक इससे पहले 3 जुलाई 2015 को मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक आदिवासी महिला को डायन घोषित कर कुछ
लोगों के द्वारा उसके साथ घिनोना कृत्य किया गया था। 16 मई 2015 झारखंड अंधविश्वास के चलते टोने-टोटके की वजह से चार महिलाओं समेत
छः लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था । यूँ तो देश में
महिलाओं को अत्याचार से बचाने के लिये कहने को तो सरकार ने कई कानून बनाये
लेकिन डायन या चूडैल बताकर प्रताडि़त करने वालो के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं
बनाया जिस कारण अपराधी के मन में कानून का
कोई खोफ नहीं है पुलिस इन मामलों में मामूली धाराएं लगाकर मामला दर्ज करती है जिस
कारण अपराधी को कडी सजा नही मिल पाती और यही वजह है कि समाज में औरतों को प्रताडित
करने का यह घिनोना कृत्य रुकने कर नाम नहीं रहा है । देश के कुछ अगडे राज्यो को
यदि छोड़ दिया जाये तो देश के पिछड़े राज्यो में खासकर असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश और पूर्वी उत्तर के कुछ
जिलो में डायन के नाम पर औरतों के साथ प्रताडना के मामलो में इजाफा हुआ है । और इन
मामलों मे सबसे बडी विडम्बना ये है कि ऐसी घटनायें अकेले में या छुपकर नहीं बल्कि
समाज के सामने और खुले आसमान के नीचे होती है दुख की बात ये है कि इन घिनोने कुकर्त्यों
पर पीडित महिला के प्रति समाज संवेदना शुन्य पाया जाता है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश
के संधावा इन्दौर में रहने वाली टेटलीबाई
और लीलाबाई को इस वजह से मौत का मुहं देखना पडा कि गाँव के ही एक आदमी भीमसिंह के
कहने पर गांव की पंचायत में डायन घोषित किया गया भीम सिंह को लगता था कि उसकी
बीमारी का कारण इन दोनो के द्वारा किये गये जादू-टोने है। एक और मामला झारखंड में
हुआ इसमें एक ही परिवार के 4 लोगों को इस वजह से जान से धोना पडा कि गुरा मुंडा और तांबा मुंडा भाई थे और सभी को
गुरा मुंडा की पत्नि पर डायन होने का शक था। उनकी सोच थी कि गुरा की पत्नि के कारण
घर में विपदाएं है । और इस कारण सबको जान से हाथ धोना पड़ा जाहिर सी बात है इन
मामलों पर जब तक कोई केन्द्रीय कानून नहीं बनेगा इस तरह के अपराधो में कोई कमी
नहीं आयेगी लेकिन इन मामलों के बढ़ने का
सबसे बडा ये होता है कि ज्यादातर
मामलें पिछडें गरीब और आदिवासी होते है जिस
कारण कोई भी केन्द्रीय सरकार ध्यान नहीं देती वहीं राज्य सरकार की संवेदना भी किसी
मामलें में तब जाग्रत होती है जब कोई मामला मिडिया या विपक्षी नेताओ के हाथ लग
जाता है और छोटा-मोटा मुवाअजा देकर अपने कर्तव्यो से इतिश्री कर ली जाती
है। स्थानीय प्रशासन और भी कागजी कारवाही के अलावा कभी ऐसा कोई कार्य नहीं
करता जिससे इस नारी विरोधी परवर्तियो में
कोई सुधार किया जाये जिस कारण महिलायें इन पाशविक कर्त्यो का शिकार होती रहती है
राजस्थान की वसुधरा राजे सरकार को धन्यवाद की जिसने गरीब महिलाओं को बचाने के लिये
डायन प्रताडना कानून प्रभावी किया जो महिलाओं को डायन चुडैल के नाम पर होने वाले अत्याचारोंसे बचाता है।
कुछ भी कहे एक सभ्य समझे जाने वाले और तेजी से विकास की और बढते देश में इस तरह की घटनाऐं होना कहीं न कहीं हमारी
आधुनिकता हमारे विकास की पोल खोल देती है
।
राजीव चौधरी
No comments:
Post a Comment